Wireless Charging क्या बैटरी खराब कर रही है? सच जान लो

K.K.-Tech Expert

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अगर आप अपने महंगे Phone को रोजाना Wireless Charging पर रखकर सोते हैं,

तो हो सकता है कि आप अनजाने में ही उसकी Battery Health को समय से पहले बर्बाद कर रहे हों।

Wireless Charging असल में Electromagnetic Induction के जरिए काम करती है,

जहां Pad का कॉइल आपके Phone के इंटरनल कॉइल में बिना केबल के पावर भेजता है।

लेकिन इस प्रोसेस में काफी एनर्जी Heat के रूप में बर्बाद हो जाती है,

जो डिवाइस के इंटरनल कंपोनेंट्स को जरूरत से ज्यादा गर्म कर देती है।

सीधे शब्दों में कहें तो यही एक्स्ट्रा Heat आपके Smartphone के बैकअप को महीनों के भीतर आधा कर सकती है

और आपकी जेब पर नया Battery रिप्लेसमेंट का भारी खर्च डाल सकती है।

इसलिए यह जानना हर यूजर के लिए जरूरी हो गया है कि दोनों Charging तरीकों में से कौन सा आपके डिवाइस को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।

Wireless Charging pad heating test on smartphone

Wireless Charging कैसे करती है Battery Health पर असर?

केबल वाली चार्जिंग में बिजली सीधे Type-C पोर्ट से Battery तक पहुंचती है, जिससे एनर्जी लॉस काफी कम रहता है।

इसके विपरीत, कॉइल्स के बीच गैप और अलाइनमेंट सही न होने पर वायरलेस पैड लगातार गर्म होने लगता है।

लिथियम-आयन सेल्स के लिए 35°C से ऊपर का तापमान धीमे जहर की तरह काम करता है।

नतीजतन, फोन का केमिकल डिग्रेडेशन तेज हो जाता है और 100% कैपेसिटी बहुत जल्दी 80% पर आ जाती है।

हालांकि आजकल कई प्रीमियम Qi2 और MagSafe चार्जर में इन-बिल्ट कूलिंग फैन आने लगे हैं,

लेकिन वे भी केबल जितनी ठंडक मेनटेन नहीं रख पाते।

Wired vs Wireless Charging: कौन सा तरीका है सबसे सेफ?

अगर आप अपने फोन को 3 से 4 साल तक बिना किसी परेशानी के चलाना चाहते हैं,

तो केबल का इस्तेमाल करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

केबल और वायरलेस के मुख्य तकनीकी अंतरों को आप नीचे दिए गए पॉइंट्स से समझ सकते हैं:

  • एनर्जी एफिशिएंसी: केबल चार्जिंग करीब 85% से 95% तक एफिशिएंट होती है, जबकि बिना तार वाली तकनीक में सिर्फ 60% से 75% एनर्जी ही फोन तक पहुंचती है।
  • थर्मल मैनेजमेंट: केबल से चार्ज करते वक्त एडॉप्टर गर्म होता है, लेकिन वायरलेस पैड पर पूरा फोन और उसकी स्क्रीन दोनों तपने लगते हैं।
  • चार्जिंग स्पीड: एक 30W या 65W का Type-C Fast Charger आपके डिवाइस को 40 मिनट में फुल कर देता है, जबकि 15W का पैड 2 घंटे से भी ज्यादा समय लेता है।
  • साइकिल लाइफ: कम तापमान में रहने की वजह से केबल से चार्ज होने वाली बैटरी 800 से 1000 साइकिल्स आसानी से पूरी कर लेती है।

देखा जाए तो रोजाना रातभर पैड पर फोन छोड़ना बैटरी की उम्र को सीधे तौर पर कम करता है।

Battery Life बचाने के लिए अपनाएं ये 3 जरूरी सेटिंग्स

अगर आप वायरलेस पैड की सुविधा को पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहते,

तो अपने फोन की सेटिंग्स में तुरंत कुछ बदलाव जरूर कर लें।

सबसे पहले Settings में जाकर 80% Limit या ‘Optimized Battery Charging’ को ऑन कर दें।

इसके अलावा, चार्जिंग पर लगाते समय हमेशा मोटा बैक कवर या लेदर केस हटा दें, ताकि हीट बाहर निकल सके।

साथ ही, कभी भी तकिए या गद्दे जैसी गर्म सतह पर चार्जिंग पैड रखकर इस्तेमाल न करें।

अगर आप ऑफिस डेस्क पर काम करते हैं, तो सिर्फ बीच-बीच में थोड़ा टॉप-अप करने के लिए ही पैड का इस्तेमाल करें, 0 से 100% भरने के लिए नहीं।

क्या आपको आज ही Wireless Charger छोड़ देना चाहिए?

अगर आप हर साल नया Flagship फोन बदलते हैं, तो आपको इस डिग्रेडेशन की बिल्कुल फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सुविधा वाकई बेहद आरामदायक है।

लेकिन अगर आपकी सोच वैल्यू फॉर मनी वाली है और आप एक ही डिवाइस को 3-4 साल तक बिना हैंग या बैकअप ड्रॉप के चलाना चाहते हैं, तो वायरलेस पैड को सिर्फ इमरजेंसी या कार ट्रैवल तक सीमित रखें।

घर और ऑफिस में हमेशा एक ओरिजिनल Type-C केबल और अच्छे एडॉप्टर से ही चार्ज करें,

क्योंकि केबल आपके फोन की लाइफ को सबसे ज्यादा सुरक्षित रखती है।

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